मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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सोमवार, 12 दिसंबर 2011

कोहरा और सुरक्षा

       उत्तर भारत में ठण्ड बढ़ने के साथ ही घने कोहरे की चादर फैलना शुरू हो जाती है और इससे होने वाली समस्याओं से निपटना भी आसान काम नहीं होता है. इसका सबसे ज़्यादा असर सभी तरह के यातायात पर पड़ता है. यह एक प्राकृतिक घटना है और इसको रोका नहीं जा सकता है फिर भी थोड़ी चौकसी और पहले से की गयी तैयारियों के साथ इसके प्रभाव से निपटने में दक्षता पायी जा सकती है. हवाई और रेल यातायात पर इसका असर विलम्ब के रूप में पड़ता है जबकि सड़क यातायात में इस समय दुर्घटनाएं बहुत बढ़ जाया करती हैं. जिस तरह से परिवहन विभाग काम करता है उसके बाद इन दुर्घटनाओं की संभावनाएं और भी अधिक हो जाया करती हैं. परिवहन विभाग केवल समय आने पर केवल कुछ अवैध वसूली पर ही ध्यान देता है और सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की तरफ़ तो उसका ध्यान भी नहीं होता है.
      सड़क मार्ग पर आजकल सबसे अधिक बाधा का कारण गन्ने की ढुलाई करने वाले वाहनों के कारण होती है इसी समय गन्ना किसान अपने खेतों से गन्ने को क्रय केन्द्रों या चीनी मिल तक पहुँचाने का काम करते हैं जिससे सड़क पर समस्या बढ़ जाया करती है. कृषि भारत का अभिन्न अंग है और इसके बिना जीने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है पर जिस तरह के जर्जर वाहनों से गन्ने को ढोया जाता है वह मुख्य समस्या का कारण बन जाया करता है. आज भी खेतों में चलने वाले ट्रैक्टर ट्राली किस अवस्था में होते हैं इसका सभी को अंदाज़ा है पर इससे तब तक समस्या नहीं होती जब तक ये खेतों में चलते हैं पर जिस दिन से ये सड़कों पर चलना शुरू करते हैं तो सभी तरह की समस्या उत्पन होने लगती है क्योंकि इनमें प्रकाश की ही समुचित व्यवस्था नहीं होती है जिससे ये समय आने पर सड़क दुर्घटना का बड़ा कारण बन जाया करते हैं.  इससे निपटने के लिए इनके मालिकों को भी इस बात के लिए जागरूक किया जाना चाहिए और उनके सहयोग से इस तरह की घटनाओं को कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए.
     इस समस्या से निपटने के लिए अब कड़े क़दम उठाने की आवश्यकता है जिससे इन वाहनों पर उचित संकेतक लगाये जा सकें क्योंकि बिना इन संकेतकों के कुछ भी कर पाना असंभव ही है और इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जाना भी कठिन है. इस तरह की दुर्घटनाओं पर रोक लगाकर जान माल की उस हानि को बचाया जा सकता है जो केवल लापरवाही के कारण ही हो जाया करती है. हर जनपद के परिवहन विभाग को पुलिस से मिलकर यह तय करना चाहिए की सभी वाहनों में उचित प्रकाश सहित अँधेरे में चमकने वाले संकेतक भी लगे हों क्योंकि इनके बिना खड़े वाहन को घने कोहरे में देख पाना असंभव होता है. यदि पुलिस विभाग थोड़ी सी ईमानदारी से इस काम को करवाने में दिलचस्पी लेने लगे और एक समय सीमा दिए जाने के बाद वाहन स्वामी द्वारा इस तरह की व्यवस्था न किये जाने पर उसके खिलाफ कठोर दंड की व्यवस्था करे जिससे इस मामले में होने वाली लापरवाही को कम किया जा सके. आम तौर पर नवम्बर माह में उत्तर प्रदेश में यातायात माह मनाया जाता है तो उसी समय इस बात पर ध्यान देकर बड़ी संख्या में वाहनों पर इस तरह के सुरक्षात्मक उपाय किये जा सकते हैं.            
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सोमवार, 27 दिसंबर 2010

फिर से कोहरे की मार

दिल्ली ने एक बार फिर से घने कोहरे के साथ सब कुछ पटरी से उतरते देखा. अभी तक कोई भी यह बता पाने में सक्षम नहीं हो पा रहा है कि आख़िर कब दिल्ली या देश के उत्तरी भागों में इस तरह से हर वर्ष हवाई और रेल यात्री परेशान होते रहेंगें फिर भी इन सारी परिस्थितियों से निपटने के लिए कोई ठोस उपाय अभी तक भारत में कुछ भी नहीं किया जा सका है. यह सही है कि इस तरह की प्राकृतिक रूप से विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए कभी भी सारा कुछ ठीक नहीं हो सकता है पर जिस स्तर पर इससे निपटा जाना चाहिए अभी तक वैसे उपाय नहीं अपनाये जा रहे हैं. दुनिया के बहुत सारे हिस्सों में आज भी हमारे यहाँ से अधिक कोहरा होता है पर वहां पर इस तरह से जिंदगी पूरी तरह से ठप नहीं हो जाया करती है ?
          रेल विभाग अभी तक कोहरे से निपटने के लिए पुरानी पटाखे लगाने वाली व्यवस्था के सहारे ही चल रहा है कहने को भारतीय रेल ने बहुत तरक्की कर ली है पर अभी भी हमें इस मामले में कोई महारत हासिल नहीं हो पायी है. वैसे भी इस देश में रेल सभी का सबसे निरीह विभाग है जो भी गुस्सा होता है वह केवल रेल को रोक कर या उसकी संपत्ति को नुक्सान पहुंचा कर ही कुछ हासिल करना चाहता है ? लगता है प्रकृति को भी रेल से कुछ ज्यादा ही प्यार है तभी मौसम का सबसे ज्यादा असर इस पर ही होता है ?
         देश में सब कुछ है पर अगर कुछ नहीं है तो वह है मज़बूत इच्छा शक्ति....... आज अगर हम चाहें तो सब कुछ कर सकते हैं पर शायद रेल भवन में बैठने के लिए हर सरकार पर दबाव डालकर इसे पाने वाले सहयोगी दल आज तक रेल को अपनी शर्तों पर ही चलते रहे हैं पिछले १५ वर्षों से सबसे बड़े सरकारी दल के पास रेल विभाग कभी भी नहीं रहा तो लगता है कि इस मंत्रालय के लिए केवल सौदे बाज़ी ही होती रहती है पर इसके विकास और सुधार पर कम ही ध्यान दिया जाता है. हवाई यात्रा के बारे में क्या कहा जाये क्योंकि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ पर सरकार से लगाकर आला अधिकारी तक बहुत दिलचस्पी लेते हैं पर इस क्षेत्र में जो सुधार किये जाने चाहिए वह अभी तक नहीं किये जा सकें है जहाँ पर कम दृश्यता में उड़ने के लिए तकनीक है तो वहां पर पायलट प्रशिक्षित नहीं हैं ? अभी सरकार ने उड़ानों के लिए कुछ नियमों में ढील देने की कोशिश की है पर इससे केवल कुछ हद तक संकट कम किया जा सकता है इसका पूरा उपचार किया जाना अभी भी बाकी है.   

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