मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 25 January 2012

राष्ट्रीय मतदाता दिवस

        चुनव आयोग ने देश के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पिछले वर्ष राष्ट्रीय मतदाता दिवस २५ जनवरी को मनाया जाना शुरू किया गया है. जिस तरह से आम लोग मतदान से विमुख रहा करते थे उससे बाहर आने और हर १८ साल से ऊपर के युवा को वोटर बनाने की चुनाव आयोग की मुहिम ने पिछले साल काफ़ी सफलता पायी थी ऐसे में इस वर्ष जब देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य यूपी समेत ५ राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं तो इस दिवस की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है. आयोग के मोटे अनुमान के अनुसार इस बार लगभग ३ करोड़ नए मतदाताओं के नाम जुड़ने वाले हैं जिनमें से आधे से अधिक वे हैं जो इस बार मतदान देने की उम्र पार कर रहे हैं. जिस तरह से चुनाव आयोग अपने प्रयासों से लगातार जनता को जागरूक करने में लगा हुआ है और जो भी सुधार चुनाव से जुड़ी दिशा में किये जा रहे हैं उनका आने वाले समय में देश को बहुत लाभ मिलने वाला है. अघोषित रूप से जो ज़िम्मेदारी हमारे नेताओं को दी गयी थी कि वे स्वतः ही हर व्यक्ति को वोटर बनवाने का प्रयास करते रहेंगें वह भी कहीं न कही पीछे छोड़ दी गयी थी.
      देश में दो दशक पहले जिस तरह से मतदान केंद्र पूरी तरह से अराजक तत्वों की भेंट चढ़ गए थे उसके बाद यही लगने लगा था कि अब देश में कभी भी मतदाता सम्मानपूर्वक अपने मत का उपयोग कर सकेगा क्योंकि उस समय होने वाली हिंसा ने मतदाताओं को वोट देने से काफ़ी हद तक रोक दिया था पर शेषन के चुनाव आयुक्त बनने के बाद ही इसमें सुधार होने शुरू हो गए थे फिर भी शेषन की नियुक्ति पर विपक्षी दलों ने बहुत हो हल्ला मचाया था क्योंकि वे किसी समय राजीव गाँधी के खास अधिकारियों में रह चुके थे. आज देश शेषन का सम्मान करता है कि उन्होंने देश को चुनावी अराजकता से बाहर निकाल लिया और पूरे चुनावी परिदृश्य को बदल कर रख दिया. उस समय भी आलोचना वादियों के पास यही सुर था कि शेषन के जाने के बाद सब कुछ पुराने जैसा ही हो जाने वाला है पर अच्छा ही हुआ कि उनके बाद आने वाले सभी चुनाव आयुक्तों ने उस परंपरा को आगे बढ़ाया और आज देश में लगभग हिंसा रहित चुनाव होना आम बात हो गयी है. अब जिस तरह से आयोग इस बात पर भी जोर दे रहा है कि जो भी मतदाता हैं वे मतदान के दिन घरों से निकलें और देश के बेहतर भविष्य के लिए अपनी पसंद के व्यक्ति को वोट दें.
   आज जिस तरह से राजनीति में गिरावट देखी जा रही है उसके पीछे कहीं न कहीं से आम जनता के वोट देने के रुझान में कमी से भी असर आया है क्योंकि जो अराजक तत्व धर्म/जाति या समूह आधारित चुनाव लड़ते हैं उनके लिए मतदान का कम प्रतिशत हमेशा ही लाभकारी होता है और वे यह नहीं चाहते कि सभी लोग अपने घरों से निकल कर वोट देने के लिए आ जाएँ क्योंकि तब उनके समर्थक कम पड़ जाते हैं और लोकतंत्र व आम जनता की जीत के साथ संविधान की भावना की जीत हो जाती है. अब यह हर वोटर का कर्तव्य है कि वो वोट देने के लिए ज़रूर जाये क्योंकि जो भी वोट देने नहीं जा रहा है वह कहीं न कहीं से इस बात का समर्थन कर रहा है कि देश में अराजक तत्व हावी हो जाएँ. अब चेत जाने का समय है क्योंकि चुनाव आयोग ने जिस तरह से मतदाताओं को इस राष्ट्रीय पर्व में सबसे आगे कर दिया है उसका लाभ उठाते हुए अब सभी को देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए जिससे आने वाले समय में कोई यह न कह सके कि पहले के लोगों ने अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं किया जिस कारण से ऐसी स्थिति बन गयी है. आइये गणतंत्र दिवस से पहले गणतंत्र को मज़बूत करने के इस क़दम में चुनाव आयोग के साथ क़दम मिलकर चलें.    
 
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