मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Tuesday, 26 November 2013

२६/११-आतंक और सुरक्षा

                               देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले की पांचवीं बरसी पर जिस तरह से स्थितियां पहले जैसी ही दिखायी देती हैं उसके लिए आज भी हमारी सोच और नीतियां ही अधिक ज़िम्मेदार हैं क्योंकि आतंकियों का मक़सद केवल निर्दोषों को मारना और यह प्रदर्शित करना है कि उनके लिए भारत में कहीं भी हमला करना और अपने मंसूबों को दिखाना मुश्किल नहीं है. कारगिल के युद्ध के बाद से कुछ हद तक पटरी पर लौटते रिश्तों को इस आतंकी हमले के बाद ने जिस तरह से पूरी तरह से स्थिर कर दिया था उसके बाद अब भारत की तरफ से कोई भी पहल नहीं की जा रही है क्योंकि विपक्षी भाजपा हर बातचीत पर चिल्ला कर यही कहती है कि कांगेस ने देश हित को गिरवी रख दिया है जबकि १९९९ में अटल की लाहौर यात्रा के समय ही पाक ने कारगिल में जिस सुनियोजित तरीके से घुसपैठ की वह भाजपा सरकार की सबसे बड़ी नाकामी ही थी ?
                              पाक के साथ देश के संबंध कभी भी सामान्य नहीं हो सकते हैं यह एक स्थापित तथ्य है और इसकी अनदेखी कई बार भारत को बहुत भारी पड़ चुकी है क्योंकि पाक में अधिकतर लोग शांति का केवल दिखावा करते हैं और मौका मिलने पर वे भारत के साथ धोखा करने से नहीं चूकते हैं. पाकिस्तान में गद्दारों का इतिहास ही रहा है और उसने कभी भी अपने पूर्व शासकों की कोई परवाह नहीं की और उन्हें पूरी तरह से दोषी बताकर उनको जेल में डालने का क्रम आज भी जारी है. इस तरह की विषम राजनैतिक और सैन्य परिस्थतियों में जब पाक का केवल एक ही मंत्र है कि किसी भी तरह से हर शासक द्वारा भारत के लिए कुछ न कुछ समस्याएं ही पैदा की जाएँ तो आने वाले समय में उससे पार पाना नामुमकिन ही लगता है. पाक का पूरा अस्तित्व ही भारत के खिलाफ जिहाद चलाने पर टिका हुआ है और जब तक पाक की मानसिकता में यह घुसा रहेगा संबंध मज़बूत तो क्या सामान्य भी नहीं रह पायेंगें.
                             यह सही है कि २००८ से अब तक भारत ने अपनी समुद्री और अन्य सीमाओं पर अपनी उपस्थिति को पहले से बेहतर ढंग से दर्ज़ कराया है फिर भी अभी भी बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ से आतंकी और भारत विरोधी तत्व आसानी से घुसकर देश में गड़बड़ी कर सकते हैं ? इन सारे क्षेत्रों को समझने और उन कमियों को दूर करने के लिए अब एक समग्र नीति की आवश्यकता है और उसमें क्षेत्रीय जनता का सहयोग भी आवश्यक कर दिया जाना चाहिए. पूरे समुद्री क्षेत्र से लगने वाले स्थानों के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए अब एक पहचान पत्र आवश्यक होना चाहिए और उसे न दिखा पाने की स्थिति में उनको सामान्य आवश्यक पूछताछ के लिए रोकने का प्रावधान भी होना चाहिए क्योंकि सीमा पर आने जाने वाले अवैध लोगों को रोकने के लिए अन्य उपायों के साथ इस तरह की अचानक से की जाने वाली चेकिंग की भी बहुत आवश्यकता है क्योंकि अभी तक एक बार भारतीय क्षेत्र में आ जाने वालों को अंदर के क्षेत्र में कोई भी नहीं पूछता है और उसका लाभ सदैव ही आतंकियों द्वारा उठाया जाता है. देश की सेना के साथ केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों में आज आम जनता की भागीदारी जोड़ना बहुत आवश्यक है क्योंकि सीमित संसाधनों के बूते जो कुछ भी किया जा रहा है वह देश के लिए पर्याप्त नहीं है.         
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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