मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Monday, 10 February 2014

पवार बनाम मोदी

                                      केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के बीच हुई एक मुलाक़ात को किस तरह से मीडिया द्वारा इतना महत्वपूर्ण बना दिया गया कि खुद शरद पवार को इस मामले में स्पष्टीकरण देना पड़ा है कि उनकी नरेंद्र मोदी से अहमदाबाद में मुलाकात हुई थी. नरेंद्र मोदी के बारे में जिस तरह से राजनैतिक छुआछूत देश की राजनीति में किया जा रहा है उसका कोई औचित्य भी नहीं है क्योंकि वे कोई तानाशाह नहीं बल्कि गुजरात की जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं चाहे अतीत में वे कितने ही विवादित क्यों न रहे हों ? देश के कृषि मंत्री क्या देश के किसी भी राजनेता से राजनैतिक या शासन के स्तर पर उनकी किसी भी मुलाकात के जो भी अर्थ मीडिया में लगाये जाते हैं उनका कोई मतलब नहीं बनता है क्योंकि सभी केंद्रीय मंत्री जिनका राज्यों के विकास से जुड़े मंत्रालयों से सीधा सम्बद्ध होता है किसी भी सीएम से मिलने से मना नहीं कर सकते हैं क्योंकि देश के किसी भी राज्य के मुखिया से केंद्रीय मंत्री के मिलने में कुछ भी गलत नहीं है पर इसमें सनसनी फैलाकर ऐसा दिखाया गया जैसे कि पवार अब राजग के साथ खड़े होने वाले हैं.
                                      शरद पवार देश के उन चंद नेताओं में से हैं जिनका आज भी व्यापक जनाधार है और वे अपने दम पर परिस्थितियों को उलटने की क्षमता रखते हैं एक समय कॉंग्रेस में सोनिया गांधी को पीएम पद तक पहुँचने से रोकने के लिए उन्होंने अपना नया दल बनाया क्योंकि उनके हिसाब से वही ठीक था पर जब उन्हें लगा कि कॉंग्रेस से अलग रहकर वे राजनैतिक आत्महत्या की तरफ जा रहे हैं तो उन्होंने उन्हीं सोनिया के नेतृत्व में चल रही कॉंग्रेस के साथ राज्य और केंद्रीय स्तर पर सीटों का समझौता कर आज तक सत्ता का सुख भी उठाया है. इस तरह के ज़मीन से जुड़े हुए नेता के बारे में जिस तरह से मीडिया के एक वर्ग ने अपने राजनैतिक आकाओं के इशारे पर पवार मोदी की मुलाकात को संप्रग में दरार के रूप में परिभाषित करने का पूरा प्रयास किया उसके बाद से ही यह माना जाने लगा था कि शरद कॉंग्रेस से दूर हो रहे हैं पर इन नेताओं को अपने वोटरों के बीच भी जाना होता है तो वे अपने स्तर से परिस्थितियों को स्पष्ट भी कर दिया करते हैं. मोदी के साथ चुनाव पूर्व खड़े होने से इन सभी को लाभ के स्थान पर हानि की सम्भावनाएं दिखायी देती हैं इसलिए ये अपने बयान देते रहते हैं.
                                       नि:संदेह मोदी ने अपने प्रयासों से पहले से ही विकास की दौड़ में शामिल गुजरात को आगे बढ़ने का काम किया है पर आज भी देश के अन्य क्षेत्रीय राजनैतिक दल और राजग के पूर्व सहयोगी इस बात से पूरी तरह से अनजान भी नहीं हैं कि अब मोदी के नेतृत्व में काम करने वाली भाजपा के साथ खड़े होने उन्हें क्या नुक्सान हो सकते हैं इसलिए अकाली दल और तेलगू देशम को छोड़कर राजग का कोई अन्य पूर्व सहयोगी दल चुनाव से पूर्व भाजपा के साथ नहीं जा रहा है जिससे जहाँ तीसरे मोर्चे की सम्भावनाएं भी बढ़ रही हैं और मोदी एक लिए रास्ता कठिन होता जा रहा है. राजनीति में कोई छुआछूत नहीं चलती है क्योंकि कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व करने वाले फारूख अब्दुल्लाह भी राजग के साथ सत्ता का सुख भोग चुके हैं पर आज वे भी खुले आम मोदी के प्रभाव वाली भाजपा के साथ खड़े होना नहीं चाहते. देश के किसी भी राज्य के सीएम से मिलना इतनी बड़ी खबर नहीं होनी चाहिए क्योंकि ऐसा भी नहीं है कि शरद पवार गुजरात की कृषि योजनाओं के लिए पहले राज्य के किसी प्रतिनिधिमंडल या मोदी से पहले कभी न मिले हों ?              
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