मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 21 February 2014

विकास की किरणें

                                आज़ादी मिलने के बाद से ही देश ने बहुत से क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है और आज देश के आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति के साथ विज्ञान और तकनीक में महारत हासिल करने की तरफ बढ़ने से जहाँ हम विकास की आधुनिक ऊंचाइयों को छूने लगे हैं वहीं दूसरी तरफ कहीं न कहीं कुछ ऐसा अवश्य है जो हमारे तंत्र में इस तरह से विद्यमान है कि आज भी देश के दूर दराज़ के क्षेत्र अपने आप में विकास की मुख्य धारा से पूरी तरह कटे हुए हैं. ऐसा नहीं है कि इनके लिए देश के पास आज आवश्यक संसाधन विद्यमान नहीं हैं पर जिस स्तर पर हमारी योजनाओं को बनाने और क्रियान्वयन पर चर्चा होने के बाद काम शुरू होना चाहिए सम्भवतः हम उसमें अभी भी बहुत पिछड़े हुए हैं. बिहार के कैमूर ज़िले के अधौरा पहाड़ी और प्रखंड के बड़वान कलां और बड़वान खुर्द नामक दो गावों की पांच हज़ार की आबादी अपने आप में ही जिस तरह से सड़कों के मामले में पूरी तरह उपेक्षित थी उसका हल ग्रामीणों से अपने दम पर सड़क बनाकर निकाल लिया है क्योंकि अभी तक किसी भी सरकार को यहाँ तक सड़क पहुँचाने के बारे में सोचने का अवसर ही नहीं मिला था ?
                                 आखिर वे कौन से कारण है जो देश के समग्र विकास के ढांचे को तैयार करने में इस तरह से इतना पीछे रह जाते हैं कि लोगों की आवश्यकताओं पर भी विचार नहीं किया ज सकता है ? यह भी सम्भव है कि नेता या दल विशेष के पक्ष में मतदान करने के कारण अभी तक के सत्ताधारी दलों ने वहाँ के विकास से आँखें मूँद रखी हों और किसी भी स्तर पर जहाँ कुछ किया जा सकता था सब कुछ शांत सा ही रखने का प्रयास किया गया हो ? बिहार ही क्या आज भी देश के लगभग सभी राज्यों में दूर दराज़ के क्षेत्रों में आम लोगों को आवागमन के साधन भी उपलब्ध नहीं है और इस पर भी सबसे चिंताजनक बात यह भी है कि सरकार के संज्ञान में लाये जाने के बाद भी इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाये नहीं जाते हैं जो कि देश के विकास में अवरोधक का काम किया करते हैं. इस परिस्थिति से निपटने के लिए लिए आखिर किस स्तर पर योजनाओं को बनाया जाये जिससे आने वाले समय में देश का कोई भी राज्य अपने यहाँ इस तरह के क्षेत्रों के साथ न दिखायी दे और देश के समग्र विकास को धरातल पर उतारा जा सके.
                                    कहने को तो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को चलते हुए भी दशक से ऊपर हो चुका है पर क्या इस क्षेत्र या इस जैसे अन्य क्षेत्रों पर ज़िला, प्रखंड या ग्राम स्तर के अधिकारियों की नज़रें नहीं पड़ती हैं और वे कौन से कारण हैं जिनके चलते अभी तक इन क्षेत्रों के बारें में कुछ ठोस और सकारात्मक प्रयास नहीं किये जा सके हैं ? अच्छा हो कि पूरे देश में एक अभियान चलाकर प्रखंड और ज़िला स्तरीय अधिकारियों से एक निर्धारित समय सीमा में स्थलीय सत्यापन करने के बाद इस पर विचार किया जाये और यदि किसी भी गाँव तक संपर्क मार्ग भी नहीं हैं तो उस पर एक निश्चित अवधि में धनराशि का आवंटन करने के बाद निगरानी में लेकर काम को पूरा किया जाये. यदि किसी क्षेत्र में विकास की ये किरणे अभी तक नहीं पहुंची हैं तो उस स्थानीय लोगों की राय भी अवश्य ही लेनी चाहिए क्योंकि अपनी समस्याओं के सही तरह से निस्तारण के लिए उनके पास सम्भवतः अच्छे विकल्प भी हो सकते हैं ? विकास की ये किरणें सभी तक पहुंचे इसके लिए अब केवल योजना नहीं वरन योजनाओं के समय सीमा में पूरा नहीं होने पर दंडात्मक कार्यवाही पर विचार करने की बातें भी होनी चाहिए तभी देश सही मायने में विकास कर पायेगा.   
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