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Tuesday, 15 July 2014

बिहार और नक्सली

                                                   बिहार के जमुई जिला प्रशासन द्वारा नक्सली गतिविधियों से निपटने के लिए जिस तरह से राज्य सरकार से १२ कम्पनी सुरक्षा बल भेजने की अतिरिक्त मांग की है उससे वहां की वास्तविक स्थिति का ही पता चलता है. एक समय बिहार में लातेहार नक्सलियों का मज़बूत गढ़ हुआ करता था पर केंद्रीय बलों के साथ सामंजस्य बिठाते हुए जिस तरह से राज्य सरकार ने यहाँ पर चौकसी बढ़ने के साथ अभियानों को बहुत ही कुशलता के साथ आगे बढ़ाया था उसके बाद यहाँ पर उनका प्रभाव कुछ कम हो गया था. उन्होंने अपनी यहाँ कमज़ोर होती ज़मीन को जमुई में फिर से बहुत मज़बूत करने की तरफ कदम बढ़ा दिए और अब जब प्रशासन को उनकी प्रभावी उपस्थिति महसूस हो रही है तो उसे अपनी उपस्थिति बढ़ाने का ख्याल आया है. इस मामले में स्थानीय प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकता है क्योंकि स्थितियों पर नज़र रखने की सबसे पहली ज़िम्मेदारी उसकी ही है.  
                                                  केंद्र सरकार ने जिस तरह से नक्सलियों के साथ बातचीत की नीति को पूरी तरह से बदल कर उनके ख़िलाफ़ कड़ी कर्यवाही करने की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है तो ऐसे में अब बिहार सरकार को भी अधिक् सचेत रहने की आवश्यकता है क्योंकि देश में कहीं से भी दबाव बढ़ने पर नक्सली उसी स्थान पर हमले करना शुरू करते हैं जहाँ उनका नेटवर्क मज़बूत होता है तो इसके लिए अब स्थाीय प्रशासन को अधिक सचेत होकर काम करने की ज़रुरत है. बिहार सरकार ने निश्चित रूप से पिछले कुछ वर्षों में नक्सलियों की गतिविधियों को रोकने में सफलता पायी है पर किसी एक विशेष क्षेत्र में सफल होने के बाद उस क्षेत्र के विकास और नक्सलियों के छिपने के सुरक्षित पडोसी ज़िलों में चौकसी बढ़ाये जाने की नीति पर संभवतः उसकी तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की गयी जिससे आज जमुई प्रशासन को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
                                                 केंद्र में चाहे किसी भी दल की सरकार रही हो पर नक्सलियों के खिलाफ अभियानों में प्रभावित राज्य सरकारों को उसकी तरफ से हर संभव मदद की जाती रही है पर आज भी विभिन्न कारकों के चलते नक्सलियों के प्रभाव को केवल कुछ समय तक के लिए ही कम किये जाने में सफलता मिल पाती है और वे अन्य जगहों पर फिर से मज़बूत होते दिखाई देते है ? अब केंद्र और राज्य को इस दिशा में समग्र कार्यवाही करने की आवश्यकता है क्योंकि केंद्र की नीति केवल नक्सलियों को हटाने तक कठोर हो चुकी जिससे अब वे हताशा में कहीं भी बड़े या छोटे हमले करने की तरफ बढ़कर अपनी उपस्थिति दिखाने की कोशिशें करते हुए दिखाई दे सकते हैं. जिन इलाकों से नक्सलियों को पूरी तरह या बहुत बड़े स्तर पर हटाया जा चुका है वहां पर मूलभूत सुविधाओं के विकास पर ध्यान देने की बहुत आवश्यकता भी है क्योंकि जब तक नागरिकों के लिए सुविधाएँ नहीं होंगीं तब तक नक्सली उन्हें अपने जाल में उलझाते ही रहेंगें. अब कठोर नीति के साथ खाली कराये गए क्षेत्रों में तीव्र विकास की तरफ बढ़ने से ही इस समस्या से निपटने में आसानी हो सकती है और आम लोगों की ज़िंदगी की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है.      
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