मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Saturday, 30 May 2015

भारत नेट- नीति में चुनौतियाँ

                                                       देश के सतत विकास के लिए किये जाने वाले महत्वपूर्ण कामों में यदि केंद्र और राज्य सरकारें एक समयबद्ध नीति बनाकर आगे बढ़ने के फैसला कर लें तो आने वाले दिनों में देश की तकदीर को बहुत सरलता से संवारा जा सकता है पर इस तरह की किसी भी योजना में हमारे नेता जिस स्तर की राजनीति किया करते हैं उसके चलते कई बार अच्छे प्रयास भी मन्ज़िल तक पहुँचने से पहले ही दम तोड़ दिया करते हैं. संप्रग सरकार ने इंटरनेट की आने वाले समय में आवश्यकता और उपलब्धता के आंकलन के चले जिस तरह से सम्पूर्ण देश के लगभग छह लाख गांवों को भी ब्रॉडबैंड से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुवात की थी आज राजग सरकार ने उस पर तेज़ी से आगे बढ़ने का निर्णय लिया है जो आने वाले समय में देश के हर गाँव तक इंटरनेट की पहुँच को सस्ते दामों में तेज़ गति से पहुँचाने में सफल हो सकती है. आज जिस तरह से हर क्षेत्र की निर्भरता नेट पर बढ़ती ही चली जा रही है उस स्थिति में केंद्रीय व्यवस्था के तहत इसे शुरू कर राज्यों के साथ मज़बूत भागीदारी कर आगे बढ़ाने के संकल्प को राष्ट्रीय नीति के रूप में लिया जाना चाहिए जिससे इसकी गति को बनाये रखा जा सके.
                                       भारत में नेट की उपलब्धता को देखते हुए आन केवल भारत संचार निगम लिमिटेड ही देश के छोटे शहरों और तकनीकी रूप से लैस कुछ गांवों तक ही तेज़ गति की ब्रॉडबैंड सेवा देने की स्थिति में है क्योंकि इस पूरी योजना पर भारी भरकम निवेश भी होता है पर निजी क्षेत्र इस तरफ अपने स्तर से निवेश करने का इच्छुक नहीं है. सार्वजनिक क्षेत्र का निगम होने के चलते संचार निगम पर इस बात की ज़िम्मेदारी स्वतः ही आ जाती है कि वह बिना लाभ की चिंता किये अपनी सेवाओं को दूर दराज़ के क्षेत्रों तक पहुंचाए तथा इसके लिए सरकार भी उसके घाटे की भरपाई के लिए अनुदान दिया करती है. आज जिस तरह से भारत नेट के काम को आगे बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं वे अपने आप में देश की आवश्यकता भी हैं क्योंकि आज भी देश के गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित ही हैं जिसमें शिक्षा, चिकित्सा रोज़गार पर बुरा असर भी दिखाई देता है यदि इन क्षेत्रों में तेज़ गति का इंटरनेट पहुँचाने में सरकार को मदद मिल पाई तो इनको भी घर बैठे ही उचित सहायता समय पर मिल सकेगी जिससे गांवों में जनजीवन का स्तर सुधारने की कोशिशों को आगे बढ़ाया जा सकेगा.
                              इस महत्वपूर्ण योजना की सफलता के लिए अभी से सरकार को इसके लिए अति आवश्यक बिजली के उपकरण और उपलब्धता के बारे में भी सोचना ही होगा क्योंकि आज भी देश में बिजली की कमी के कारण देश के अधिकांश राज्यों के गांवों में हालत बहुत ही खराब है. बिजली की उपलब्धता जब तक होगी तब तक इन गांवों में किस तरह से आवश्यक ऊर्जा को उपलब्ध कराया जाये यह भी महत्वपूर्ण है. देश में सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली संकट से काफी हद तक पार पाया जा सकता है तो जिन गांवों में अगले वर्ष तक भारत नेट उपलब्ध होने वाला है वहां की परस्थितियों का आंकलन करने के बाद इन केन्द्रों पर बिजली की उपलब्धता के लिए अभी से नीति बनायीं जानी चाहिए जिससे जब गांवों तक भारत नेट पहुंचे तो लोगों के पास बिजली की कमी होने से नयी तरह की समस्या न उत्पन्न हो जाये ? गांवों में २४ घंटे बिजली की उपलब्धता अभी कई दशकों तक एक सपना ही रहने वाली है क्योंकि आज उन राज्यों में शहरी क्षेत्रों में बिजली की मांग में बेतहाशा वृद्धि के चलते गांवों में बिजली गुल होने लगी है जहाँ २४ घंटे आपूर्ति एक मिसाल हुआ करती थी. एक अच्छी नीति से भरपूर लाभ लेने के लिए जिस तरह की नीति होनी चाहिए अभी भारत नेट उस पर खरी दिखाई नहीं दे रही है और आशा है कि सरकार इस योजना के इस पहलू पर भी विचार करने के बाद अभी से ठोस उपाय करने के बारे में कदम उठाएगी.     
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

No comments:

Post a Comment