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Monday, 15 June 2015

रेलवे परिचालन और समयबद्धता

                                 आम जनता द्वारा पीएम की सोशल मीडिया पर पहुँच के बाद जिस तरह से रेलवे से जुडी हुई समस्याओं के बारे में शिकायतों का अम्बार लगना शुरू हो गया उसके बाद खुद पीएमओ की पहल पर रेल मंत्रालय ने अब ट्रेनों के लेट चलने को लेकर एक रिपोर्ट तैयार करने के बारे में विचार किया है और इसके लिए उसने आईआईटी से भी मदद मांगी है. वैसे देखा जाये तो रेलवे की अधिकांश ट्रेन थोड़े या लम्बे समय के लिए रोज़ ही लेट होती रहती हैं जिनमें परिचालन से सम्बंधित मसले ही अधिक हुआ करते हैं जबकि कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों के संचालन में आज भी रेलवे अपनी समयबद्धता को सही ढंग से निभा पाने में पूरी तरह से सफल कही जा सकती है. पिछले वर्ष सत्ता में आने के बाद सरकार ने आपातकाल के समय ट्रेनों के सञ्चालन से जुडी फाइल्स को खंगालने का काम भी बाबुओं से करवाया था क्योंकि यह वही समय था जब देश में पहली बार और लगातार लम्बे समय तक ट्रेन अपने सही समय से चलती थीं और उनकी सेवाओं में गुणात्मक सुधार भी आ गया था तो सोचने वाली बात यह भी है कि आखिर जो काम तब हो सकता था अब उसे करने में क्या दिक्कत है ?
                         अधिकांश मामलों में परिचालन से जुड़े मामलों पर किसी भी तरह से अधिकारियों कर्मचारियों को उतना ज़िम्मेदार नहीं बनाया गया है जितना उन्हें होना चाहिए पर अब समय आ गया है तभी रेल मंत्रालय ने इस दिशा में स्टडी के माध्यम से यह जानने का प्रयास शुरू कर दिया है कि आखिर किन कारणों से ट्रेन इतना लेट चलने लगती हैं कि उन्हें सँभालने के लिए कई बार एक दिन उनकी सेवा को निरस्त करने के लिए बाध्य होना पड़ता है ? परिचालन में कर्मचारियों, पटरी, बिजली आपूर्ति, इंजनों की स्थिति और स्टेशन के कारक भी कई बार बहुत ज़िम्मेदार होते हैं क्योंकि आजकल गर्मियों में ट्रेन की सेवाएं अधिकांश बार इंजन के फेल होने से होती है या फिर स्टेशन स्टाफ के असहयोग के चलते भी ट्रेनों में सुविधाओं के नाम पर जब पानी आदि नहीं होता है तो भी उन्हें नयी जगह रोक कर इन सुविधाओं को उपलध कराया जाता है. लम्बी दूरी के ट्रेनों के परिचालन में जिस तरह से अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती विभिन्न कारणों से की जाती है यदि उनकी ज़िम्मेदारी को भी सुनिश्चित किया जा सके तो आने वाले समय में इस व्यवस्था को सुधारने में काफी मदद मिल सकती है.
                   ट्रेन लेट होने के अधिकांश मामलों में तकनीकी कमी नहीं ही पायी जाती है फिर भी परिचालन सही नहीं हो पाता है तो अब इसके आंकलन और सुधार के लिए व्यापक प्रयास किये जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है. रेलवे ने देश के व्यस्ततम रेल खंड दिल्ली-मुगलसराय पर इस तरह की एक स्टडी शुरू भी कर दी है जिससे संभवतः विशेष कमियों के बारे में आईआईटी अपनी राय दे पाने में सफल हो सके क्योंकि अभी तक अपने प्रयासों के बाद भी इतने महत्वपूर्ण मार्ग पर भी ट्रेनों के संचालन को पूरी तरह से पटरी पर नहीं लाया जा सका है. इतने बड़े संस्थान में अलग अलग जगहों पर अलग अलग कारणों से ट्रेन लेट हो सकती हैं पर इस पहली बार की जा रही स्टडी के माध्यम से कम से कम रेलवे को एक अंदाज़ा तो हो सकता है कि आखिर इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जा सकता है ? यदि ट्रेन और मालगाड़ियों के परिचालन को सही किया जा सके तो रेलवे को माल ढुलाई से बहुत अधिक आमदनी हो सकती है क्योंकि एक अनुमान के अनुसार आज रेलवे लगभग एक लाख करोड़ रुपयों का घाटा केवल अपनी इस लेट लतीफी के कारण ही उठता है और इस समस्या से निपटने के लिए वह आज भी रास्ते खोजने की कोशिश में ही है.    
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