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Friday, 19 June 2015

घरेलू गैस - डीबीटीएल में घोटाला

                                     यूपी और बिहार से कुछ मामलों के सामने आने के बाद जिस तरह से घरेलू गैस की सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के खाते में पहुँचाने की एक महत्वपूर्ण परियोजना को संगठित भ्रष्टाचार से बड़ा झटका लगा है सरकार को उसके बारे में कुछ विशेष सोचने की आवश्यकता है. यह योजना अपने आप में पूरी तरह से सटीक है फिर भी अभी तक अपनी पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर हर बात में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले राजग सरकार इस मुद्दे पर बहुत अधिक घिर भी सकती है क्योंकि यह मामला केवल अच्छी नीतियां बनाने से ही सम्बंधित नहीं है उसके सफल क्रियान्वयन से भी बहुत अधिक जुड़ा हुआ है. डीबीटीएल की पहली परिकल्पना संप्रग सरकार ने ही की थी क्योंकि उसे यह दिखाई दे रहा था कि इस क्षेत्र में सरकार द्वारा जो भी सब्सिडी दी जाती है उसका बड़े पैमाने पर दुरूपयोग होता रहता है और सरकार चाहकर भी पुरानी व्यवस्था के अंतर्गत उसे रोक पाने में पूरी तरह से विफल ही रही तो यह सोच विकसित हुई कि सब्सिडी की धनराशि सीधे ही बैंक खाते में भेजने का काम शुरू किया जाये जिससे उपभोक्ताओं तक वास्तविक मदद को पहुँचाया जा सके.
                             इस मामले के उजागर होने से यह बात स्पष्ट हो गयी है कि उपभोक्ताओं के डीबीटीएल फॉर्म भरते समय जिस तरह से मनमानी की गयी क्या उसमें अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि यूपी के पूर्वांचल में जिस स्तर पर लोगों के बैंक की गलत जानकारी भरी गयी उसके बाद यह स्पष्ट है कि गैस कंपनियों की तरफ से जो फॉर्म उपलब्ध कराये गए थे उनमें भी पूरी जानकारी के दोबारा फीड करने पर किसी भी तरह की रोक नहीं थी वर्ना सैकड़ों लोगों की सब्सिडी किसी एक खाते में जाती रही और किसी को कुछ भी पता नहीं चल पाया ? इस पूरे खेल में संभवतः ये गैस एजेंसियां भी पूरी तरह से शामिल रही हैं क्योंकि बिना संचालकों के इतने बड़े पैमाने पर हेर-फेर करने की हिम्मत आखिर कैसे की जा सकती थी इस प्रकरण में अब जाँच में जो कुछ भी सामने आये सबसे पहले उन संचालकों से डीलरशिप छीन लेने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए जिससे अन्य संचालकों पर भी इस बात में पारदर्शिता बरतने का दबाव बनाया जा सके तथा उपभोक्ताओं के लिए भी पूरी व्यवस्था में अपनी जानकारी को जांचने की सही व्यवस्था भी की जानी चाहिए.
                                  प्राथमिक तौर पर इस मामले में एक सार्वजनिक अधिसूचना जारी कर उन सभी उपभोक्ताओं को अपने बैंक खातों को फिर से चेक करने की व्यवस्था की जानी चाहिए जिन्हें अभी तक एक बार भी सब्सिडी नहीं मिल पाई है क्योंकि बड़ा खेल वहीं पर खेल जा रहा है साथ ही गैस कम्पनियों को अपने सॉफ्टवेयर में इस बात का संशोधन भी करना चाहिए कि जब एक व्यक्ति के नाम से दो कनेक्शन नहीं हो सकते हैं तो दो व्यक्तियों की सब्सिडी एक बैंक खाते में कैसे जा सकती है ? जहाँ कहीं भी सब्सिडी जाने के लिए एक खाते को दोबार उपयोग में लाया गया है उन्हें चिन्हित कर फिर से जाँच करने के बाद ही सब्सिडी देने की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि जब तक इस मामले में सख्ती नहीं की जाएगी तब तक सुधार संभव भी नहीं है. केंद्र सरकार के स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव यह भी किया जा सकता है कि सब्सिडी का रास्ता उल्टा कर दिया जाये जिसमें उपभोक्ताओं को गैस सब्सिडी काटकर ही पहले की तरह उपलब्ध करायी जाये और सब्सिडी की धनराशि सीधे गैस कम्पनी के खाते में भेज दी जाये जिससे कुल सब्सिडी दिए जाने में व्याप्त अनियमितता को पूरी तरह से रोका जा सकता है और तीनों गैस कम्पनियों के लिए भी यह बहुत आसान हो जायेगा कि उन्हें यह धनराशि सीधे मिलने लगेगी.              
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