मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Friday, 3 July 2015

भारतीय वीआईपी संस्कृति

                                     एक हफ्ते में ही दो बार पहले मुंबई में महाराष्ट्र के सीएम और फिर लेह में गृह राज्य मंत्री किरण रिजूजू के कारण एयर इंडिया की उड़ानों में विलम्ब होने की ख़बरों के सामने आने के बाद जिस तरह से पीएमओ ने पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है उससे उड्डयन मंत्रालय से लगाकर सत्ता के गलियारों में सनसनी मच गयी है. यह सही है कि लम्बे समय से महत्वपूर्ण व्यक्तियों की यात्राओं को लेकर जिस तरह से सरकारी विमान कम्पनी के दुरूपयोग की बातें सदैव ही सामने आती रही हैं उन पर अभी तक कोई रोक नहीं लगायी जा सकी है. इस बार खुद पीएमओ के स्तर से मामले को देखने के कारण सबसे पहले रिजूजू और फिर नागरिक उड्डयन मंत्री राजू ने प्रभावित लोगों से असुविधा के लिए माफ़ी मांगी और साथ ही जांच के आदेश भी दे दिए हैं. इस बारे में अब पूरा दारोमदार एयर इंडिया की रिपोर्टों पर ही टिक् गया है क्योंकि यदि जानबूझकर इन विमानों को देरी से उड़ाया गया है तो रिपोर्ट में यह सामने भी आ सकता है पर क्या वह रिपोर्ट भी निष्पक्ष रूप से बनायीं जाएगी अब सब उस पर ही निर्भर करता है.
                       वैसे तो इन मामलों में कोई कार्यवाही आम तौर पर नहीं हो पाती है क्योंकि शिकायतों को गंभीरता से किया और लिया ही नहीं जाता है जिससे शिकायतकर्ता के पास न्याय पाने की सम्भावना भी कम ही होती पर इस इस बार इन दोनों मामलों को मीडिया द्वारा जिस तरह से उठाया गया और उसके बाद से लगातार इस पर कड़ी नज़र भी रखी जा रही थी उसके बाद इससे बचने की सम्भावना समाप्त हो जाने पर पीएमओ ने मामले को सँभालने की कोशिश की है. वैसे तो यदि इन दोनों मामलों में कोई गड़बड़ी पायी जाती है तो नेताओं का तो कुछ भी नहीं बिगड़ने वाला है पर एयर इंडिया के कर्मचारियों पर सजा की मार अवश्य ही पड़ सकती है. क्या देश के महत्वपूर्ण नेताओं को लाने ले जाने के मामले में एयर इंडिया पर किसी तरह का दबाव होना चाहिए या फिर उसे अपने हिसाब से काम करने की खुली अनुमति होनी चाहिए ? जिन लोगों के अघोषित आदेशों पर यह दोनों उड़ने देर से रवाना हुईं क्या उनके खिलाफ कोई कार्यवाही आज के परिप्रेक्ष्य में संभव भी है क्योंकि दोनों ही सरकारों में महत्पूर्ण पदों पर बैठे हुए लोग हैं.
                    यदि किसी तकनीकी कारण से ही उड़ान देरी से जाती है तो इसका ब्यौरा सम्बंधित विमानन कम्पनी और हवाई अड्डे से मिल सकता है क्योंकि ऐसी स्थिति में परिचालन का पूरा परिदृश्य दोबारा से निर्धारित किया जाता है और कई बार अन्य उड़ानों पर भी इसका असर पड़ जाता है यदि कोई बड़ा परिवर्तन हुआ होगा तो वह हवाई अड्डों पर भी संज्ञान में आ चुका होगा और पूरा मामला वहीं से स्पष्ट हो जायेगा पर क्या सरकार अपने लोगों के बचाव के लिए इस तरह की रिपोर्ट नहीं बनवा सकती है यह भी सोचने का विषय है. इस मामले में चाहे जो भी बात सामने आये पर आने वाले समय में किसी भी वीआईपी के लिए इस तरह की गतिविधि पर पूरी तरह रोक लगाये जाने के लिए अब एक पूरी तरह से पारदर्शी तंत्र बनाया जाना चाहिए और उस पर कड़ाई से अमल करने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह से सरकारी विमान कम्पनी एयर इंडिया का दुरूपयोग न किया जा सके. देश की जनता और मीडिया के चलते अब हर बात सबकी नज़रों में आ जाती है इसलिए वीआईपी लोगों को खुद ही इस संस्कृति से बाहर निकलने के बारे में सोचना चाहिए जिससे पूरे परिदृश्य जो सुधारा भी जा सके.    
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