मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Sunday, 20 September 2015

माननीयों के मानवीय गुण

                                              विराम खंड, गोमतीनगर लखनऊ के रहने वाले एक बुजुर्ग कृष्ण कुमार के साथ शहर के दिल और अति महत्वपूर्ण कहे जाने वाले जीपीओ के सामने जिस तरह से स्थानीय चौकी प्रभारी ने हद दर्ज़े की अभद्रता की और उनके इस कृत्य के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने जिस तरह से उनके घर हिंदी और इंग्लिश के नए टाइपराइटर भेजने के लिए खुद लखनऊ के डीएम और एसएसपी को निर्देशित किया आमतौर पर नेताओं की तरफ से ऐसा कम ही देखने को मिलता है. पूरे मामले में इन बुजुर्ग कृष्ण कुमार का कसूर केवल इतना ही था कि वे बोहनी भी न होने के कारण उस दिन पुलिस को वे २०/३० रूपये देने की स्थिति में नहीं थे जो उनसे रोज़ ही वसूले जाते थे इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार ने उनका पुराना टाइप राइटर पूरी तरह से तोड़ डाला था जिसके माध्यम से वे अपने परिवार को चलाने के लिए कुछ पैसों का जुगाड़ कर लिया करते थे. मामला सामने आने पर जिस तरह से खुद सीएम ने इस मामले में दखल दिया वह अपने आप में अनुकरणीय है क्योंकि इससे यह सन्देश भी पुलिस प्रशासन और समाज में आसानी से चला जाता है कि मामला सीएम के संज्ञान में आने पर कठोर कार्यवाही भी संभव है.
                                                                    इस मामले के मजबूरी, आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलू भी देखे जाने आवश्यक है क्योंकि आखिर ऐसा क्यों है कि जिन लोगों के लिए समाज और सरकार की तरफ से कुछ ठोस व्यवस्था होनी चाहिए वे जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी इस तरह से संघर्ष करने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं ? सम्मान के साथ रोज़ी रोटी जुटाने की इस जद्दोजहद में क्या किसी आम नागरिक को यह अधिकार भी नहीं होना चाहिए कि वह अपने स्तर से ईमानदारी से सामान्य तौर पर दूसरों के मार्ग में बाधा न बनते हुए कुछ करने के बारे में सोच सके ? इतनी लम्बी चौड़ी योजनाओं के बाद भी आखिर हमारे इस तरह के बुजुर्ग इन कल्याणकारी सेवाओं से अगर वंचित हैं तो उसके पीछे क्या कारण है ? केंद्र और राज्य सरकारें केवल योजनाओं को बना तो सकती हैं पर उनके धरातल पर क्रियान्वयन केवल किसी कर्मचारी द्वारा ही किया जाता है जिसमें भ्रष्टाचार की पूरी गुंजाईश भी रहा करती है और आने वाले समय के लिए बुजुर्गों के लिए उनमें से कुछ भी नहीं मिल पाता है. आज के समय में यदि कुछ ऐसा किया जा सके की किसी भी योजना के लिए निर्धारित पात्रों को चुनने में कोई गड़बड़ी मिले तो सम्बंधित लोगों को दण्डित करने की व्यवस्था भी बनाई जाए जिससे सरकारी मशीनरी में ईमानदारी और दृढ़ता से काम करने की मंशा भी जगाई जा सके.
                                          ऐसा भी नहीं है कि हमारे देश के नेताओं में इस मानवीय गुण का पूरी तरह से ह्रास हो चुका है क्योंकि समय समय पर विभिन्न जगहों से इस तरह की ख़बरें सामने आती ही रहती हैं जिनमें नेताओं द्वारा इस तरह के काम किये जाते हैं. क्या यह अच्छा नहीं होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए एक अलग से शिकायत करने के लिए निर्धारित व्यवस्था बनाई जाये जिसको केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से मिलकर चलाया जाये. इस तरह के प्रयास के लिए सरकार को कुछ खास करने की आवश्यकता नहीं है बस हर ई-सुविधा केंद्र को इस तरह से सम्बंधित विभाग की शिकायत करने का अधिकार मिल जाये और इसके लिए विशेष रूप से एक सॉफ्टवेयर भी बनाया जाना चाहिए जो पूरी तरह से हर सम्बंधित जानकारी को शिकायत के समय ही मांग ले और इसकी एक कॉपी संबंधित जिलाधिकारी के कार्यालय समेत अन्य सम्बंधित विभागों को भी मेल कर दी जाये. इस तरह से किसी के लिए भी काम करना आसान ही होने वाला है और इस नयी व्यवस्था से लोगों की शिकायतें उन लोगों तक भी पहुँच सकती हैं जहाँ उनकी आवश्यकता होती है. सीएम अखिलेश ने निश्चित तौर पर बहुत अच्छा काम कर सरकार की तरफ से यह सन्देश दे ही दिया है कि किसी को भी इस तरह के उत्पीड़न से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकार काम करने के लिए तत्पर है.       
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