मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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शनिवार, 13 मार्च 2010

छत्तीसगढ़ में निलंबन...

राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक प्रस्तुत करने पर हंगामा करने वाले सांसदों को जिस तरह से निलंबित किया गया था वह बिलकुल ठीक था आखिर देश की लोकतान्त्रिक मर्यादा को बचाए रखने के लिए इस तरह की सख्ती अब बहुत आवश्यक हो गयी है. इसी घटनाक्रम की ताज़ा कड़ी में कल  छत्तीसगढ़ विधान सभा से भी २९ विधायकों को निलंबित कर दिया गया है. देश में जहाँ कहीं भी इस तरह का उत्पात माननीयों द्वारा किया जाये उनको तुरंत निलंबित कर दिया जाना चाहिए आखिर लोकतंत्र को बचाने का उत्तर दायित्व केवल सरकार पर ही कैसे डाला जा सकता है उसे चलाने और बचाने का उतना ही ज़िम्मा विपक्षियों का भी तो है ?
        इस संबंध में जब विधायिका में पूरी व्यवस्था है कि किस तरह से सदन में काम काज होना चाहिए तो फिर ये माननीय क्यों वहां पर व्यवस्था बिगाड़ने का खेल खेलते रहते हैं ? उनको ऐसा करने की अनुमति संविधान ने नहीं दी है फिर वे मनमानी कैसे कर सकते हैं ? अब देश ने इन लोगों की अराजकता को बहुत सहन कर लिया केवल निलंबन के अतिरिक्त इन पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए और जिन लोगों के कारण सदन के काम में बाधा आई है उनकी रेकार्डिंग देख कर जितनी देर बाधा आई है उस खर्चे की भरपाई उन सभी से करनी चाहिए. यह सारा धन जो उनकी अराजकता के कारण बर्बाद होता है उनके वेतन/ भत्तों और आवश्यकता पड़ने पर पेंशन से भी काट लिया जाना चाहिए. यह रास्ता कुछ अच्छा नहीं दिखाई देता पर जब ये लोग हमारा पैसा बर्बाद करने पर ही लगे हुए हैं तो उसके बदले इनको भी तो कुछ आर्थिक दंड भी मिलना ही चाहिए ?
       जिन लोगों को हर जगह संघर्ष करने की आदत है उन्हें देश के दूर दराज़ के इलाकों में जाकर भूख, भय , बीमारी आदि से दो दो हाथ करने चाहिए न कि जनता की गाढ़ी कमी के पैसों को केवल सदनों में बर्बाद करना चाहिए ? अब भी समय है यदि ये नेता नहीं चेते तो फिर जनता ही इनको सबक सिखाने पर उतर ही आएगी....

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

सोमवार, 6 अप्रैल 2009

जनता क्या करे ?

आज जब देश पूरी तरह से चुनाव के रंग में रंग हुआ है तो एक बात फिर से याद आती है कि आख़िर कब तक हम वोटरों के सामने अच्छा चुनने का विकल्प नहीं आएगा। आज तो हमारे पास एक ही चारा है कि किसी एक उम्मीदवार को वोट दें । मेरे विचार से यह बहुत ही अच्छा हो यदि एक विकल्प ऐसा भी हो जिससे हम सभी उम्मीदवारों को वोट देने से मना कर सकें। आज जिस तरह से ये नेता हमारे सामने नत-मस्तक हुए जा रहे हैं कल ये धूल उडाते हुए निकल जायेंगें और इनमें से अगर कोई मंत्री बन गया तो फिर तो टी वी पर ही उनके दर्शन होंगें। कितना अच्छा हो यदि हमारे पास उम्मीदवार/उम्मीदवारों को नकारने का विकल्प भी हो ? इस से न केवल ग़लत लोगों पर अंकुश लग सकेगा वरन किसी पार्टी द्वारा लालच वश किसी नाकारा आदमी को खड़ा किए जाने पर भी वोटर उसे नकार सकेंगें। राजनीति में शुचिता की बातें तो बहुत लोग करते हैं और जब ये लोग सार्वजानिक मंच पर होते हैं तो इनसे अच्छा कोई नहीं होता पर व्यक्तिगत जीवन में ये सभी कितनी गिरी हुई हरकत करने से भी बाज़ नहीं आते हैं ? क्या जनता के पास इनको रोकने का कोई हथियार है ? नहीं !! जब तक चुनाव सुधार ठीक से लागू नहीं किए जाते यह सम्भव नहीं होगा। कुछ लोग कह सकते हैं कि कोर्ट ने इस बारे में तय कर रखा है और संजय का केस इसका उदाहरण है पर मात्र एक से काम नहीं चलेगा हमें तो पूरे के पूरे ही साफ़ सुथरे लोग चाहिए। खैर अब जिस तरह से युवा वोटर्स की संख्या बढ़ी है उससे यह उम्मीद की जा सकती है कि आगे कुछ सुधार भी होंगें और शायद दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र तब सबसे पवित्र लोकतंत्र भी हो जाएगा।
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...