मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

सड़क सुरक्षा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सड़क सुरक्षा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 31 दिसंबर 2018

लोकतंत्र से भीड़तंत्र तक

                              पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न कारणों से इकठ्ठा हुई भीड़ द्वारा जिस तरह से किसी को भी दोषी बताकर मौके पर ही क़ानून हाथ में लेते हुए फैसले लेने की बढ़ती हुई प्रवृत्ति दिखाई देने लगी है वह निश्चित तौर पर किसी सभ्य समाज का हिस्सा नहीं हो सकता है. पहले डायन के नाम पर फिर बच्चे चुराने वाले के नाम पर फिर धर्म के नाम पर फिर गाय के नाम पर और अब केवल मनमानी के नाम पर जिस तरह से देश के सामने नयी तरह की समस्या आ रही है उससे यदि समय रहते बचने और निपटने की राह नहीं निकाली गयी तो आने वाले समय में हम एक हिंसक समाज से अधिक कुछ भी नहीं बनने वाले हैं ? आखिर वे कौन से कारण हैं जिनके चलते किसी समस्या कोलेकर इकठ्ठा हुए कुछ सैकड़ा लोग किसी अन्य इंसान की हत्या करने से भी नहीं चूकते हैं जबकि उन्हें इस बात का अंदाज़ा भी होता है कि मामला आगे बढ़ने पर उनके व उनके परिवार के लिए बड़े स्तर पर मुश्किलें खडी हो सकती हैं ?
                              निश्चित तौर पर पिछले कुछ वर्षों में बदले राजनैतिक विमर्श और विचारधारा विशेष से असहमत होने वाले किसी भी व्यक्ति से इस तरह से निपट लेने की जो प्रवृत्ति सामने आ रही है उसके पीछे उन विचारधाराओं का भी हाथ है जो इस तरह की सामूहिक अराजकता में भी अपने लिए राजनैतिक अवसरों को खोजकर उनका लाभ उठाने से नहीं चूकती हैं. क्या आज जिस तरह से कुछ लोगों द्वारा अपना जनाधार मज़बूत किये जाने के लिए किये जाने वाले इस तरह के कामों को करने में जुटे हुए हैं तो उनको सही कहा जा सकता है ? आखिर वे कौन से कारण हैं जिनके चलते हमारे राजनेता भी जनता से जुड़कर काम करने और उनकी समस्याओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करके उन्हें दूर करने के स्थान पर विद्वेष पैदा करके अपने हितों को साधने में लगे हुए हैं ? इस मामले में लगभग सभी दलों की स्थिति एक जैसी ही कही जा सकती हैं पर आज यह प्रवृत्ति जितने बड़े पैमाने पर शुरू हो रही है वह चिंता का विषय है क्योंकि इस अराजक भीड़ ने अब कानून के रखवालों पर भी हाथ साफ़ करना शुरू कर दिया है जिससे आने वाले समय में कोई भी सुरक्षित नहीं रहने वाला है.
                          भीड़ की हिंसा के लाभ उठाने के चक्कर में जिस तरह से राजनेताओं की तरफ से भी केवल आवश्यकतानुसार बयान दिए जाते हैं और उनमें से कई बयान तो इतने शर्मनाक होते हैं कि उनका ज़िक्र करना भी उचित नहीं है फिर सुधार की गुंजाईश कहाँ बचती है ? आज तक जो प्रश्न जनता के सामने थे वे पुलिस और प्रशासन के सामने आ चुके हैं और स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि किसी दिन किसी नेता के भीड़ में फँस जाने पर उनकी हत्या की आशंका से भी नकारा नहीं जा सकता है ? इतना सब देखने के बाद भी यदि सिर्फ तात्कालिक लाभों के लिए देश की युवा पीढ़ी के मन में नफरत की दीवारों को ऊंचा कर वैमनस्यता  की खाई को केवल गहरा करने में ही कुछ लोगों को अपना लाभ दिखाई दे रहा है तो अब आम भारतीय के जागने का समय आ चुका है क्योंकि यदि हमारे बच्चे इसी तरह से अराजक माहौल का हिस्सा बनते रहे तो किसी दिन वे या तो किसी भीड़ का शिकार हो सकते हैं या खुद भीड़ में शिकारी की भूमिका में भी दिखाई दे सकते हैं जिससे अंत में हमारे परिवार, समाज और राष्ट्र को ही नुकसान होने वाला है.           

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

मंगलवार, 12 जून 2018

सड़क सुरक्षा - नियम और अनुपालन

                           देश में तेज़ी से बेहतर होती सड़कों और वाहनों में नयी तकनीक आने के बाद बढ़ती हुई रफ़्तार ने जिस तरह से आम लोगों के सफर को आसान किया है वहीँ कुछ लापरवाहियों से उनकी ज़िंदगियों को बहुत खतरे में डालना शुरू कर दिया है अब इस पर व्यापक विचार विमर्श और राजमार्गों पर चलते समय नियमों का पूरी तरह पालन करने की तरफ सोचने का समय आ गया है. संत कबीर नगर के छात्र छात्रों का एक टूर हरिद्वार के लिए निकला था जिसमें से एक बस में डीज़ल ख़त्म हो जाने के कारण पूरा काफिला एक्सप्रेस वे पर ही रुक गया था. एक बस से प्राचार्य समेत कुछ  लोग डीजल की व्यवस्था के लिए गए हुए थे उसी समय शिक्षकों और छात्रों ने एक्सप्रेस वे पर ही घूमना शुरू कर दिया जो कि अपने आप में बहुत बड़ी चूक ही कही जा सकती है क्योंकि सुबह सवेरे तीन बजे क्या एक्सप्रेस वे पर किसी भी समय इस तरह से पैदल घूमना अपने आप एक बहुत बड़ा खतरा ही है फिर भी इस रास्ते और यातायात से अनजान इस समूह ने जाने अनजाने जो गलती की उसके फलस्वरूप ही कई छात्रों और एक शिक्षक की जान भी चली गयी. इस पूरी घटना के लिए अब किसी को भी ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है पर क्या हम एक नागरिक के तौर पर सड़क सुरक्षा से जुडी अपनी ज़िम्मेदारियों का अनुपालन करते हैं अब खुद से यह गंभीर सवाल पूछने का समय आ गया है.
                                  इस दुर्घटना में जब नुकसान हो चुका है तो क्या आगे आने वाले समय में इस तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हम सब को जागरूक होने की आवश्यकता नहीं है? आखिर क्यों हम अपनी लापरवाही  से खुद और दूसरों की जान से खिलवाड़ क्यों करते हैं? क्या हम सभी की यह ज़िम्मेदारी नहीं बनती है कि खुद को सुरक्षित रखते हुए दूसरों को भी सुरक्षित महसूस कराने की तरफ कदम बढ़ायें? निश्चित तौर पर सरकार की तरफ स इस मामले में बहुत कुछ नहीं किया जा सकता है क्योंकि आजकल जिस तरह से सामान्य प्रशासनिक कार्यों तक के लिए जनहित याचिकाओं के माध्यम से सरकार को काम करने के लिए मजबूर करने की स्थिति बन चुकी है उस परिस्थिति में सरकार और यातायात पुलिस पूरे वर्ष खुद इस कार्य के लिए तत्पर रहेगी यह सोचना ही गलत है क्योंकि सभी कार्य केवल राजनैतिक हानि लाभ और व्यक्तिगत सुविधा को ध्यान में रखते हुए ही किये जाने की जो परंपरा देश में विकसित हो चुकी है उससे पार पाने की आवश्यकता भी है. अच्छा हो कि हमारे शैक्षिण विषयों  में यातायात से जुड़े हुए कुछ अध्याय अवश्य होने चाहिए जिससे भविष्य के नागरिक हमारे बच्चे सड़क पर सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना सीख सकें। एक विषय के रूप में यह भले ही न पढ़ाया जा सके पर इसकी आवश्यकता पर विचार करने की मजबूरी आज सामने आ चुकी है.
                                   यदि इस टूर पर जाने वाले समूह के लोगों को एक्सप्रेस वे पर घूमने के  संभावित खतरों के बारे में जानकारी होती तो निश्चित रूप से वे सचेत रहते और पूरे समूह को सचेत रखने का प्रयास भी करते पर जिस तरह से यह दुर्घटना हुई वह थोड़ी सावधानी से टाली अवश्य जा सकती थी. अच्छा हो कि पूरे देश के राजमार्गों और एक्सप्रेस वेज़ के बारे में सड़क परिवहन मंत्रालय को अपनी वेबसाइट पर पूरी जानकारी और सावधानियों को दिखाना चाहिए और निजी क्षेत्र या पीपीपी मॉडल पर बनने वाले हर एक्सप्रेस वे के लिए अपनी वेबसाइट बनाना अनिवार्य किया जाना चाहिए जिसमें उस पूरे मार्ग पर उपलब्ध सुविधाओं आपातकालीन सेवाओं तथा दुर्घटना सम्भाव्य स्थानों के बारे में वहां जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए जिससे इन मार्गों का उपयोग करने वाले यह जानकारी पहले से ही ले सकें। एक नागरिक और यात्री के रूप में हम सभी को भी यह समझना होगा कि सरकार हमें अच्छी सड़कें दे सकती है पर उस पर चलने के लिए हमें खुद ही सभी कानूनों का अनुपालन करना होगा जिससे खुद सुरक्षित चलते हुए दूसरों को भी सुरक्षा का एहसास दिला सकें। लम्बी दूरी के यात्रियों के लिए एक वीडियो जारी किया जाना चाहिए जिसे रास्ते में पड़ने वाले पेट्रोल पम्प्स और टोल केंद्रों पर एक हाल में चलाने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए जिससे आराम करते समय चालक और अन्य यात्री इन सावधानियों के बारे में जानकारी ले सकें और हमारी यात्रा सुगम होने के साथ सुरक्षित भी हो सके.

मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...