मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

Wednesday, 5 August 2015

२६/११ और पाक

                                                           अपनी गलती मानकर भारत के साथ २६/११ हमले पर सहयोग करने के स्थान पर पाकिस्तान ने आज तक इस मसले से अपने को अलग करने की असफल कोशिशों के चलते पूरी दुनिया में संदेहास्पद और आतंक समर्थक राष्ट्र के रूप में बनी अपनी छवि के अनुरूप ही काम किया है पर जिस तरह से विभिन्न तरह  के खुलासे लगतार होते रहते हैं उनके बाद क्या भारत को पाक के साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता नहीं है ? क्या पडोसी देश से अच्छे सम्बन्ध बनाये रखना भारत की ही ज़िम्मेदारी है और पाक उस ज़िम्मेदारी से पूरी तरह से मुक्त है क्योंकि आज तक जांच और अभियोजन के स्तर पर २६/११ के हमले में पाक ने गंभीर प्रयास कभी भी नहीं किये हैं और वह इस हमले में अपनी संलिप्तता से पूरी तरह से इंकार ही किया करता है. पाक की संघीय जांच एजेंसी एफआईए के पूर्व डायरेक्टर जनरल तारिक खोसा ने जिस तरह से पाक के पूरे तंत्र पर इस मामले में गंभीरता न दिखने का आरोप लगाया है वह भारत की उस बात की पुष्टि ही करता है कि इस पूरे हमले में पाक में बैठे हुए लोग ही शामिल थे और यहाँ तक कि सेना ने भी उनका भरपूर समर्थन किया था.
                                   पाक अपने जन्म से ही एक असफल राष्ट्र के रूप में दक्षिण एशिया समेत आज तक पूरे विश्व के लिए सरदर्द ही बना हुआ है क्योंकि वह पिछले सदी में इस्लाम के नाम पर भारत से अलग काटकर बनाया गया एक राष्ट्र था जो कभी भी इस्लाम के सही उसूलों का अनुपालन नहीं कर पाया और चूंकि उसका जन्म ही धार्मिक आधार पर हुआ था तो प्रारम्भ में उसने अपने को उदार दिखाने की कुछ कोशिशें भी कीं पर उनमें सत्यता न होने के कारण उसे कोई खास सफलता नहीं मिल पायी तो वहां के सैन्य शासकों ने सत्ता का दुरूपयोग करना शुरू कर दिया साथ ही पूरे विश्व में इस बात को फ़ैलाने की कोशिशें भी करनी शुरू कर दीं जिनके माध्यम से वह अपने को इस्लाम कर रखवाला देश साबित कर सके. धर्म के शासकीय मामलों में दुरूपयोग में पाक ने संभवतः पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया जब उसने जिहाद के नाम पर इस्लामी जगत से पैसा ऐंठना शुरू कर दिया जिससे पाक धीरे धीरे चरमपंथियों का अड्डा बन गया और आज खुद उसकी सेना को उस चरमपंथ से निपटने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है जिसको कभी सेना और सरकार में बैठे हुए लोगों ने भरपूर प्रश्रय दिया था.
                                 इस बड़े खुलासे के बाद अब भारत के पास पाक से सम्बन्ध सुधारने के लिए कितने विकल्प शेष बचते हैं यह जानने की आवश्यकता भी है क्योंकि भारत की तरफ से पहले संप्रग और अब राजग सरकार द्वारा कड़ी कार्यवाही की बातें तो की जाती हैं पास साथ ही उससे अच्छे सम्बन्ध बनाये रखने की प्रतबद्धता भी जताई जाती है. यह भारतीय जन-मानस का स्वभाव है कि वह अपने दुश्मन के साथ भी अच्छे सम्बन्ध बनाये रखने के लिए प्रयासरत रहे और वही सरकारों में बैठे हुए लोगों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करता रहता है. चुनावों से पहले भाजपा और मोदी ने खुद सरकार बनने पर जिस तरह से पाक को सबक सिखाने की बातें की थीं और सरकार के शपथ ग्रहण में अच्छी शुरुवात भी की थी क्या पाक ने उसका सही अर्थों में उत्तर दिया है ? यदि पाक अपने वायदों में पूरी तरफ से विफल रहा है भारत को भी द्विपक्षीय संबंधों के लिए अब पाक के सामने हर बार दोस्ती का हाथ बढ़ाने के स्थान पर अपने हाथ को रोकने के बारे में भी सोचना चाहिए क्योंकि भारत की विनम्रता को पाक उसकी मजबूरी ही समझता है जिससे सकारात्मक बातें सामने नहीं आ पाती हैं. अब समय आ गया है कि देश को हर समय अस्थिर करने की साज़िशों में लगे हुआ पाक के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी सख्त रवैया अपनाया जाये जिससे उसे भी वास्तविकता को स्वीकारने में मजबूर किया जा सके.    
मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

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